नहरें बेपानी, कैसे बुझेगी गेहूं में लगी आग

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सिद्धार्थनगर : इस समय पछुआ हवा में आग की घटनाएं बढ़ी हैं। आग की एक चिगारी भी बड़े हादसे को अंजाम देने के लिए काफी है। ऐसे में अलर्ट रहने की जरूरत है। खेतों में लहलहा रही गेहूं की फसलों में आग लगने का खतरा बढ़ गया है। अग्निशमन विभाग ऐसे हादसों से निपटने के लिए अभी तक तैयार नहीं दिख रहा है। दो दमकल गाड़ी के बल पर पूरे तहसील की जिम्मेदारी है। सतर्कता से ही आग से होने वाली घटनाओं को रोका जा सकता है।खेतों से होकर गुजरे जर्जर बिजली के तार गेहूं की फसलों को राख करने के लिए मुंह बाए झूल रहे हैं। वहीं आग बुझाने में अहम रोल निभाने वाली नहरें सूखी पड़ी हैं।गेहूं के सीजन में किसानों को प्रतिवर्ष आगजनी की घटनाओं से नुकसान झेलना पड़ता है। खेतों में आग लगने का मुख्य कारण किसान की लापरवाही और बिजली की तारों में स्पार्किंग होती है। बीते वर्ष आगजनी की सबसे ज्यादा घटनाएं हुई। क्षेत्र में गेहूं की कटाई का कार्य शुरू हो चुका है। कटाई का कार्य अभी कुछ गांवों में ही हुआ है। अधिकांश गांवों में गेहूं की फसलें अभी कटाइ के इंतजार में हैं। खेतों में अगलगी की घटनाओं पर काबू पाने के लिए नहरों का अहम रोल होता है, लेकिन अप्रैल के पहले पखवाड़े में ही नहरें बेपानी हैं। यह हाल तब है जब सरयू नहर खंड व उतरौला पंप प्रणाली के मार्फत नहरों का जाल बिछा हुआ है। सरयू नहर खंड 4 बलरामपुर की मेन शाखा में लगभग एक माह से पानी नहीं आया है, आग बुझाने में हमेशा नहरों का योगदान रहा है। लेकिन नहरों में पानी न होने से किसानों के माथे पर चिता की लकीरें साफ देखी जा सकती है। अवर अभियंता सरयू नहर ऋषि राज ने कहा शीघ्र पानी छोड़ा जाएगा।

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