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Siddharthnagar News: ट्रैक या ट्रायल नहीं, दलाल चाहिए, बन जाएगा ट्रक का भी लाइसेंस

सिद्धार्थनगर। अगर आपको जिले में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना है तो ट्रैक या ट्रायल की जरूरत नहीं है। जरूरत है दलाल की। दलाल मिल जाए तो भले ही आपको साइकिल भी चलाने न आता हो, ट्रक सहित भारी वाहनों का लाइसेंस भी आसानी से बन जाएगा। दरअसल, परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की परीक्षा के लिए ट्रैक प्वाइंट ही नहीं है। ऐसे में जो भी ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा रहे है वे कोरम पूर्ति कर जारी कर दिए जा रहे हैं। अगर आपकी सेटिंग ठीक है तो आपको आरटीओ कार्यालय भी नहीं जाना पड़ेगा। घर बैठे आवेदन और घर पर ही ड्राइविंग लाइसेंस मिल जाएगा।

परिवहन विभाग ने जिला प्रशासन से ट्रैक प्वाइंट के लिए दो एकड़ जमीन की मांग की है, लेकिन जमीन नहीं मिल सकी है। इस कारण कार या अन्य वाहनों की ड्राइविंग सड़क पर कराकर ही पास घोषित कर दिया जाता है, जबकि कुछ लोगों को ट्रायल की भी जरूरत नहीं होती है। परिवहन विभाग में दलालों की पुरानी सेटिंग है। यदि दलाल चाह ले तो ट्रायल की जरूरत खत्म हो जाती है। ड्राइविंग लाइसेंस की परीक्षा में भी दलालों की खूब चलती है। परिवहन विभाग के कार्यालय से हर दिन 30 से 40 ड्राइविंग लाइसेंस जारी होते हैं, इनमें ट्रायल से परीक्षा तक सेटिंग का खेल जारी है। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए बार-बार परेशान होने से बचने के लिए लोग पहले ही सेटिंग कर लेते हैं ताकि उन्हें आसानी से लाइसेंस मिल जाए। परिवहन विभाग की कार्यालय तक जाने वाली सड़क संकरी है। इस सड़क पर भारी वाहनों को ले जाने में कठिनाई होती है, इस कारण ट्रक चालक हाईवे पर ही ट्रक खड़ा करके कार्यालय जाते हैं।

आरटीओ कार्यालय में सेटिंग नहीं है तो ड्राइविंग लाइसेंस मिलना टेढ़ी खीर है। लर्निंग लाइसेंस का शुल्क 350 रुपये है, जबकि 1000 रुपये अधिक खर्च करने पर दलालों के माध्यम से आसानी से लाइसेंस मिल जाता है।
कृपाशंकर त्रिपाठी, अधिवक्ता

एआरटीओ कार्यालय में डीएल की परीक्षा, रिन्युवल आदि के लिए रेट तय है। ट्रैक प्वाइंट ही नहीं है तो भारी वाहनों का ट्रायल कैसे होगा। 1000 से 1500 रुपये खर्च करिए तो आसानी से काम हाे जाता है।

अनिल कुमार विश्वकर्मा, अधिवक्ता

जमीन खोजी जा रही है। दो जगहों पर जमीन देखी भी गई है। जल्द ही जमीन फाइनल करके ड्राइविंग टेस्ट कराया जाएगा। तत्कालीन एआरटीओ ने मामले में जिला प्रशासन को भी पत्र भेजा है।
– अजय कुमार सिंह, वरिष्ठ सहायक, एआरटीओ कार्यालय

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