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भनवापुर (सिद्धार्थनगर)। बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं, 70 किमी दूर जाना मजबूरी

 
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भनवापुर (सिद्धार्थनगर)। क्षेत्र के सीएचसी सिरसिया में शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं होने से बच्चों के इलाज में परेशानी हो रही है। मासूमों को इलाज के लिए 70 किमी दूर जिला अस्पताल या बस्ती ले जाना पड़ रहा है। बाढ़ के बाद व बदलते मौसम में सर्दी, खांसी, बुखार, जुकाम, निमोनिया आदि बीमारियां बढ़ रही है। बच्चों की तबीयत खराब होने पर लोगों की मुश्किलें बढ़ जा रही हैं।
भनवापुर क्षेत्र जिला मुख्यालय और बस्ती से दूर है। मल्दा गांव के तीन वर्षीय बेटी खुशी का इलाज कराने सीएचसी आए उसके पिता ने बताया कि करीब एक सप्ताह से उनकी बेटी को खांसी-सर्दी के साथ बुखार आ रहा है। डॉक्टर ने बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी।

खुरपहवा के दस साल के किशोर की भी दो दिन से तबीयत खराब है। वह सीएचसी आए। उन्हें भी दो दिन की दवा देकर ठीक न होने पर बाहर दिखने की सलाह दी गई।
तेनुई की रीता, पिकौरा की किरन अपनी एक-एक माह की बच्ची को दिखाने आई थीं। जिसे निमोनिया व सांस लेने में दिक्कत थी, जिन्हें बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी गई।
अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा ने कहा कि डॉक्टरों की तैनाती के लिए लगातार मांग की जा रही है, जो भी डॉक्टर तैनात हैं, उन्हीं से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।



सर्दी-खांसी, निमोनिया की समस्या : डॉ. पीएन पटेल
भनवापुर। सीएचसी सिरसिया में मंगलवार को इलाज कर रहे चिकित्सक डॉ. पीएन पटेल ने बताया कि बाढ़ के बाद मच्छरों के प्रकोप व बदलते मौसम के कारण इन दिनों बच्चे ज्यादा बीमार हो रहे हैं। ज्यादातर बच्चों में खांसी, सर्दी, बुखार, जुकाम के साथ ही निमोनिया के लक्षण दिख रहे हैं। अगर मरीज को ज्यादा दिक्कत है तो बाहर बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी जाती है।

पीआईसीयू के सभी बेड फुल
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल के पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट) के सभी 15 बेड फुल हैं। कभी-कभी एक बेड पर दो बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है।




बच्चों को नियमित अंतराल पर दूध पिलाती रहें माताएं

पीआईसीयू के प्रभारी डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच बच्चों के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई है। इस मौसम में एक साल उम्र तक के बच्चे ज्यादा बीमार हो रहे हैं। सर्दी लगने के बाद बुखार, खांसी और दस्त हो रही है। ओपीडी के 100 मरीजों में 60-70 बच्चे निमोनिया के कारण ही बीमार मिल रहे हैं। माताओं को चाहिए कि बच्चों को नियमित अंतराल पर दूध पिलाएं। खुद सर्दी से बचें और बच्चों को भी बचाती रहें।

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