सिद्धार्थनगर: दो भाइयों के शव देखकर रो पड़ा इलाका

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बढ़नी। क्षेत्र के लोहियानगर मोहल्ले में शनिवार की रात दो जवान भाइयों का शव एक साथ पहुंचा तो फूट-फूट कर रोने की आवाज से रात का सन्नाटा टूटने लगा। इस दर्दनाक दृश्य को देखकर पूरा इलाका स्तब्ध रह गया। हर ओर मातम छाया रहा। रविवार को अधेड़ पिता गम्मे यादव कलेजे पर पत्थर रखकर अपने दोनों बेटों को मुखाग्नि देंगे। बेटों का शव जब घर पहुंचा तो पिता और छोटी बहन रोते बिलखते हुए बेसुध हो गए। गमगीन माहौल में रिश्तेदार अंत्येष्टि की तैयारी में जुटे थे।

पल्लेदार गम्मे यादव (55) के बाद उनके दोनों बेटे चिग्घू और गुल्ले ने पाई-पाई जोड़कर आशियाना बनाने की कोशिश की लेेकिन अच्छे घर में रहने का सपना अधूरा ही रह गया। अलग-अलग सड़क हादसे में दोनों भाई की मौत के बाद पूरा कुनबा ही उजड़ गया। प्रधानमंत्री आवास योजना से मिली रकम से उन्होंने आशियाने की बुनियाद रखी लेकिन छह माह में यह सपना पूरा नहीं हो पाया। उनकी दो बेटियों की शादी हो चुकी है। गम्मे यादव को बेटों की मौत से उबर पाना संभव नहीं है। तीसरी और छोटी बेटी का घर बसाने की चिंता भी उन्हें सताती रही।

गांव होता तो पहुंच जाते नेता
बढ़नी नगर पंचायत में हुए इस हादसे से हर कोई दुखी है। श्रम साधना से जीवन यापन करने वाले परिवार के पास खेत का अभाव है। पिता गम्मे यादव के सिर पर कर्ज का भी बोझ है। पिता पल्लेदारी करते थे और बेटों ने भी उसे ही रोजी-रोटी का जरिया बना लिया था। ग्राम पंचायत चुनाव में दावेदार मदद के लिए जरूरतमंदों की तलाश कर रहे हैं लेकिन नगर पंचायत के इस हादसे में जनप्रतिनिधि ढांढस बंधाने भी नहीं पहुंचे। जबकि, अधिकारियों ने भी इस परिवार के गहरे जख्म पर मरहम लगाने की संवेदना नहीं दिखाई।
…और रास्ते में खराब हो गई गाड़ी
मेडिकल कॉलेज गोरखपुर से शनिवार दोपहर 3:30 बजे परिवार को चिग्घू और गुल्ले का शव मिला। गम्मे यादव के भतीजा दिलीप यादव ने बताया कि पीपीगंज और कैम्पियरगंज के बीच गाड़ी खराब हो गई। इस कारण शव को घर पहुंचने में ज्यादा वक्त लगा। रास्ते में रोते हुए पिता, बहनों और रिश्तेदारों का संभालना मुश्किल था। उधर, मोहल्ले के लोगों को भी शव पहुंचने का इंतजार था।

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